📖 जॉन एलिया · कविता संग्रह

जॉन एलिया

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विशेष कविताएँ

रम्ज़
तुम जब आओगी तो खोया हुआ पाओगी मुझे
मेरी तन्हाई में ख़्वाबों के सिवा कुछ भी नहीं
...
ये ग़म क्या दिल की आदत है
ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो
किसी से कुछ शिकायत है नहीं तो
...
आज भी तिश्नगी की क़िस्मत में
आज भी तिश्नगी की क़िस्मत में
सम-ए-क़ातिल है सलसबील नहीं
...
रम्ज़ ग़ज़ल
तुम जब आओगी तो खोया हुआ पाओगी मुझे
मेरी तन्हाई में ख़्वाबों के सिवा कुछ भी नहीं
...
ये ग़म क्या दिल की आदत है ग़ज़ल
ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो
किसी से कुछ शिकायत है नहीं तो
...
आदमी वक़्त पर गया होगा ग़ज़ल
आदमी वक़्त पर गया होगा
वक़्त पहले गुज़र गया होगा
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आगे असबे ख़ूनी चादर ग़ज़ल
आगे असबे ख़ूनी चादर और ख़ूनी परचम निकले
जैसे निकला अपना जनाज़ा ऐसे जनाज़े कम निकले
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ठीक है ख़ुद को हम बदलते हैं ग़ज़ल
ठीक है ख़ुद को हम बदलते हैं
और अपने लिए निकलते हैं
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ख़ुद से रिश्ते रहे कहाँ उन के ग़ज़ल
ख़ुद से रिश्ते रहे कहाँ उन के
ग़म तो जाते थे राएगाँ उन के
...
आज भी तिश्नगी की क़िस्मत में ग़ज़ल
आज भी तिश्नगी की क़िस्मत में
सम-ए-क़ातिल है सलसबील नहीं
...
आख़िरी बार आह कर ली है ग़ज़ल
आख़िरी बार आह कर ली है
मैं ने ख़ुद से निबाह कर ली है
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आप अपना ग़ुबार थे हम तो ग़ज़ल
आप अपना ग़ुबार थे हम तो
याद थे यादगार थे हम तो
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अब जुनूँ कब किसी के बस में है ग़ज़ल
अब जुनूँ कब किसी के बस में है
उसकी ख़ुशबू नफ़स-नफ़स में है
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अब किसी से मिरा हिसाब नहीं ग़ज़ल
अब किसी से मिरा हिसाब नहीं
मेरी आँखों में कोई ख़्वाब नहीं
...
उसके पहलू से लग के चलते हैं ग़ज़ल
उसके पहलू से लग के चलते हैं
उसके पहलू से लग के चलते हैं
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हम तो जैसे यहाँ के थे ही नहीं ग़ज़ल
हम तो जैसे यहाँ के थे ही नहीं
और हम जैसे बहुत सारे हैं
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हर बार मेरे सामने आती रही हो तुम ग़ज़ल
हर बार मेरे सामने आती रही हो तुम
हर बार मेरे सामने आती रही हो तुम
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रात बहुत याद आई ग़ज़ल
रात बहुत याद आई और ज़रा सी बात थी
वो तिरी बात थी वो तिरी वो इक बात थी
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कोई हालत नहीं ये हालत है ग़ज़ल
कोई हालत नहीं ये हालत है
मुझको अपनी नई मुहब्बत है
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ख़ामोशी कह रही है कान में क्या ग़ज़ल
ख़ामोशी कह रही है कान में क्या
ख़ामोशी कह रही है कान में क्या
...
मुझको अपनी नई मुहब्बत है ग़ज़ल
मुझको अपनी नई मुहब्बत है
कोई हालत नहीं ये हालत है
...
मेरी हर बात बे-असर ही रही ग़ज़ल
मेरी हर बात बे-असर ही रही
नुक़्स है मेरे हर बयाँ में क्या
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हम को यारों ने याद भी न रखा ग़ज़ल
हम को यारों ने याद भी न रखा
जॉन यारों के यार थे हम तो
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तुम हकीकत नहीं हो हसरत हो ग़ज़ल
तुम हकीकत नहीं हो हसरत हो
तुम हकीकत नहीं हो हसरत हो
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चाँद तारे बिलावजह ख़ुश हैं ग़ज़ल
चाँद तारे बिलावजह ख़ुश हैं
मैं तो किसी और से मुख़ातिब हूँ
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दिल तमन्ना से डर गया ग़ज़ल
दिल तमन्ना से डर गया जानम
सारा नशा उतर गया जानम
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मुस्तक़िल बोलता रहता हूँ ग़ज़ल
मुस्तक़िल बोलता रहता ही रहता हूँ
कितना ख़ामोश हूँ मैं अंदर से
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मेरी तारीफ करे ग़ज़ल
मेरी तारीफ करे या मुझे बदनाम करे
जिसने जो भी बात करनी है सर-ए-आम करे
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अब सँवारते रहो बला से मेरी ग़ज़ल
अब सँवारते रहो बला से मेरी
दिल ने सरकार ख़ुदकुशी कर ली
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एक नाटक है ज़िंदगी ग़ज़ल
एक नाटक है ज़िंदगी जिस में
आह की जाए, वाह की जाए
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तुम्हारी बात से बिखरी हैं ग़ज़ल
तुम्हारी बात से बिखरी हैं ये बातें सारी
तुम्हारी बात से बिखरी हैं ये बातें सारी
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हम आहंगी नहीं दुनिया से तेरी ग़ज़ल
हम आहंगी नहीं दुनिया से तेरी
तुझे इस पे नदामत है नहीं तो
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अज़ीयत नाक उम्मीदों से तुझ को ग़ज़ल
अज़ीयत नाक उम्मीदों से तुझ को
अमाँ पाने की हसरत है नहीं तो
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तू रहता है ख़याल-ओ-ख़्वाब में गुम ग़ज़ल
तू रहता है ख़याल-ओ-ख़्वाब में गुम
तो इस की वजह फुरसत है नहीं तो
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सबब जो इस जुदाई का बना है ग़ज़ल
सबब जो इस जुदाई का बना है
वो मुझ से ख़ूबसूरत है नहीं तो
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हुआ जो कुछ यही मक़्सूम था क्या ग़ज़ल
हुआ जो कुछ यही मक़्सूम था क्या
यही सारी हिकायत है नहीं तो
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तुम्हारे होने से है सब कुछ मुझ को ग़ज़ल
तुम्हारे होने से है सब कुछ मुझ को
तुम्हारे न आने से है बेहाल
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तू नहीं है तो मैं क्या हूँ ग़ज़ल
तू नहीं है तो मैं क्या हूँ, तेरे बिना क्या मैं
तेरे होंठों पे हो जो नाम, वो है मेरा नाम
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जब मैं तुम्हें निशात-ए-मुहब्बत न दे सका ग़ज़ल
जब मैं तुम्हें निशात-ए-मुहब्बत न दे सका
तो क्या हुआ, तो क्या हुआ
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तुम जिस ज़मीं पर हो ग़ज़ल
तुम जिस ज़मीं पर हो मैं
तुम जिस ज़मीं पर हो मैं
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हम भी क्या कम थे ग़ज़ल
हम भी क्या कम थे लेकिन उन को गवारा न था
शाम-ए-मसीहा थी या रात-ए-सियाह थी
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शाम-ए-मसीहा थी या रात-ए-सियाह थी ग़ज़ल
शाम-ए-मसीहा थी या रात-ए-सियाह थी
हम भी क्या कम थे लेकिन उन को गवारा न था
...
बे-तरह नागवार थे हम तो ग़ज़ल
बे-तरह नागवार थे हम तो
सख़्त बे-एतिबार थे हम तो
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तुम्हारे आने से पहले ग़ज़ल
तुम्हारे आने से पहले कुछ ज़रा पहले
बात तुझ से ही कर रहा था मैं
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जॉन शहादतजादा हूँ मैं ग़ज़ल
जॉन शहादतजादा हूँ मैं और ख़ूनी दिल निकला हूँ
मेरा जूनू उसके कूचे से कैसे बेमातम निकले
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यूँ जो तकता है आसमान को तू ग़ज़ल
यूँ जो तकता है आसमान को तू
कोई रहता है आसमान में क्या
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हमारे शौक़ के आँसू ग़ज़ल
हमारे शौक़ के आँसू वो जाँ-निसारी हैं
तुम्हारी बात से बिखरी हैं ये बातें सारी
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कितने ऐश उड़ाते होंगे ग़ज़ल
कितने ऐश उड़ाते होंगे कितने इतराते होंगे
कितने ऐश उड़ाते होंगे कितने इतराते होंगे
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मैं जो हूँ जॉन एलिया हूँ जनाब ग़ज़ल
मैं जो हूँ जॉन एलिया हूँ जनाब
मुझसे पूछो मेरा हाल जनाब
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मैं तो तन्हा ही था ग़ज़ल
मैं तो तन्हा ही था तन्हा ही रहूँगा
तेरे बिना जीना हो तो क्या करूँगा
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हम कि ए दिल सुखन-सरापा थे ग़ज़ल
हम कि ए दिल सुखन-सरापा थे
हम कि ए दिल सुखन-सरापा थे
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तेरी आँखों में एक बात है ग़ज़ल
तेरी आँखों में एक बात है
तेरी आँखों में एक बात है
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तेरी यादें हैं ग़ज़ल
तेरी यादें हैं, तेरे ख़्वाब हैं
तेरी बातें हैं, तेरी आवाज़ है
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ज़िंदगी का मज़ा क्या ग़ज़ल
ज़िंदगी का मज़ा क्या जो तू न हो
हर घड़ी बे-मज़ा है जो तू न हो
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मेरी आँखों में आँसू हैं ग़ज़ल
मेरी आँखों में आँसू हैं तेरे
मेरे दिल में दर्द है तेरा
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