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ख़ामोशी कह रही है कान में क्या
ख़ामोशी कह रही है कान में क्या
चार सू मेहरबान है चौराहा
चार सू मेहरबान है चौराहा
हालत-ए-हाल के सबब हालत-ए-हाल ही गई
हालत-ए-हाल के सबब हालत-ए-हाल ही गई
कितने ऐश उड़ाते होंगे कितने इतराते होंगे
कितने ऐश उड़ाते होंगे कितने इतराते होंगे
ख़ुद से हम इक नफ़स हिले भी कहाँ
ख़ुद से हम इक नफ़स हिले भी कहाँ
#ग़ज़ल
#JohnElia
#UrduPoetry
#Ghazal