📖 जॉन एलिया · कविता संग्रह

जॉन एलिया

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तेरी यादें हैं

ग़ज़ल 1954 156 0 जॉन एलिया
तेरी यादें हैं, तेरे ख़्वाब हैं
तेरी बातें हैं, तेरी आवाज़ है

मैं तो तन्हा ही था तन्हा ही रहूँगा
तेरे बिना जीना हो तो क्या करूँगा

दिल को समझाना मुश्किल है मुझ पर
उसे तो तेरी ही याद है हर पल

तेरी आँखों में बसा है मेरा दिल
तेरी आँखों में बसा है मेरा दिल

तेरी यादों में है मेरी ज़िंदगी
तेरी यादों में है मेरी ज़िंदगी
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