📖 जॉन एलिया · कविता संग्रह

जॉन एलिया

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मैं तो तन्हा ही था

ग़ज़ल 1957 143 0 जॉन एलिया
मैं तो तन्हा ही था तन्हा ही रहूँगा
तेरे बिना जीना हो तो क्या करूँगा

दिल को समझाना मुश्किल है मुझ पर
उसे तो तेरी ही याद है हर पल

तेरे बिना कैसे जियूँ तेरे बिना कैसे बिताऊँ
तू ही बता दे मुझे अब क्या है बात

मेरी आँखों में आँसू हैं तेरे
मेरे दिल में दर्द है तेरा

तेरी यादें हैं, तेरे ख़्वाब हैं
तेरी यादें हैं, तेरे ख़्वाब हैं
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