📖 जॉन एलिया · कविता संग्रह

जॉन एलिया

वापस जाएं

हम कि ए दिल सुखन-सरापा थे

ग़ज़ल 1956 145 0 जॉन एलिया
हम कि ए दिल सुखन-सरापा थे
हम कि ए दिल सुखन-सरापा थे

तेरी आँखों में एक बात है
तेरी आँखों में एक बात है

तुम बहुत जाज़िब-ओ-जमील सही
तुम बहुत जाज़िब-ओ-जमील सही

मेरी अक्ल-ओ-होश की भी बात सुनो
मेरी अक्ल-ओ-होश की भी बात सुनो

तुम हकीकत नहीं हो हसरत हो
तुम हकीकत नहीं हो हसरत हो

इक हुनर है जो कर गया हूँ मैं
इक हुनर है जो कर गया हूँ मैं
#ग़ज़ल #JohnElia #UrduPoetry #Ghazal
होम खोज सहेजे प्रोफ़ाइल