📖 जॉन एलिया · कविता संग्रह

जॉन एलिया

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यूँ जो तकता है आसमान को तू

ग़ज़ल 1961 165 0 जॉन एलिया
यूँ जो तकता है आसमान को तू
कोई रहता है आसमान में क्या

क्यूँ न पूछूँ कि क्या मिला उन को
वो जो हर चीज़ से निकलते हैं

जो तेरी नज़र हो तो वो क्या चीज़ है दुनिया
जो तेरी नज़र हो तो वो क्या चीज़ है दुनिया

मैं तुझ को जहाँ देखूँ वहाँ जाने के लिए आ
मैं तुझ को जहाँ देखूँ वहाँ जाने के लिए आ

हैरान हूँ क्यूँ आप ने मुझ को न पुकारा
हैरान हूँ क्यूँ आप ने मुझ को न पुकारा

मैं आप के क़रीब हूँ आने के लिए आ
मैं आप के क़रीब हूँ आने के लिए आ
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