📖 जॉन एलिया · कविता संग्रह

जॉन एलिया

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हम को यारों ने याद भी न रखा

ग़ज़ल 1984 189 0 जॉन एलिया
हम को यारों ने याद भी न रखा
जॉन यारों के यार थे हम तो

तुम ने हम को भी कर दिया बरबाद
नादिर-ए-रोज़गार थे हम तो

ख़ुद को दौरान-ए-हाल में अपने
बे-तरह नागवार थे हम तो

सह भी लेते हमारे तानों को
जान-ए-मन जाँ-निसार थे हम तो

ख़ुश न आया हमें जिए जाना
लम्हे लम्हे पे बार थे हम तो

तुम से ही मुस्तआर थे हम तो
तुम ने कैसे भुला दिया हम को
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