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अब किसी से मिरा हिसाब नहीं
मेरी आँखों में कोई ख़्वाब नहीं
ख़ून के घूँट पी रहा हूँ मैं
ये मिरा ख़ून है शराब नहीं
मैं शराबी हूँ मेरी आस न छीन
तू शराबी है तुझ को आस नहीं
मुझ को सब सूझता है रात को
मुझ को दिन में कुछ भी सूझ नहीं
तू ने ख़्वाबों में मुझ को देखा है
मुझ को हँसना है तेरी याद नहीं
#ग़ज़ल
#JohnElia
#UrduPoetry
#Ghazal