📖 जॉन एलिया · कविता संग्रह

जॉन एलिया

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कोई हालत नहीं ये हालत है

ग़ज़ल 1988 134 0 जॉन एलिया
कोई हालत नहीं ये हालत है
मुझको अपनी नई मुहब्बत है

हम कि ए दिल सुखन-सरापा थे
हम कि ए दिल सुखन-सरापा थे

तेरी आँखों में एक बात है
तेरी आँखों में एक बात है

तुम बहुत जाज़िब-ओ-जमील सही
तुम बहुत जाज़िब-ओ-जमील सही

मेरी अक्ल-ओ-होश की भी बात सुनो
मेरी अक्ल-ओ-होश की भी बात सुनो

तुम हकीकत नहीं हो हसरत हो
तुम हकीकत नहीं हो हसरत हो
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