📖 जॉन एलिया · कविता संग्रह

जॉन एलिया

वापस जाएं

हम तो जैसे यहाँ के थे ही नहीं

ग़ज़ल 2002 123 0 जॉन एलिया
हम तो जैसे यहाँ के थे ही नहीं
और हम जैसे बहुत सारे हैं

तेरी यादों का आलम देखकर
हम तो यूँ ही रह गए ख़ाली

हर बार मेरे सामने आती रही हो तुम
हर बार मेरे सामने आती रही हो तुम

तुम जिस ज़मीं पर हो मैं
तुम जिस ज़मीं पर हो मैं

जब मैं तुम्हें निशात-ए-मुहब्बत न दे सका
जब मैं तुम्हें निशात-ए-मुहब्बत न दे सका
#ग़ज़ल #JohnElia #UrduPoetry #Ghazal
होम खोज सहेजे प्रोफ़ाइल