📖 जॉन एलिया · कविता संग्रह

जॉन एलिया

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मैं जो हूँ जॉन एलिया हूँ जनाब

ग़ज़ल 1958 134 1 जॉन एलिया
मैं जो हूँ जॉन एलिया हूँ जनाब
मुझसे पूछो मेरा हाल जनाब

दिल का क्या है ये आदत है पुरानी
कोई बैठा है ख़याल जनाब

ये जो ख़ामोश हूँ सब कहते हैं
इस ख़ामोशी में है क्या राज जनाब

तेरे आने से है सब कुछ मुझ को
तेरे न आने से है बेहाल जनाब

क्या बताऊँ मुझे क्या चाहिए क्या
तू ही समझ मेरा क्यूँ है हाल जनाब
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