📖 जॉन एलिया · कविता संग्रह

जॉन एलिया

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ज़िंदगी का मज़ा क्या

ग़ज़ल 1953 112 0 जॉन एलिया
ज़िंदगी का मज़ा क्या जो तू न हो
हर घड़ी बे-मज़ा है जो तू न हो

दिल ये कहता है दुनिया से बेज़ार हूँ
दिल ये कहता है दुनिया से बेज़ार हूँ

है कोई और भी इस के सिवा
है कोई और भी इस के सिवा

तेरे होने से है सब कुछ मुझ को
तेरे होने से है सब कुछ मुझ को

तू नहीं है तो क्या है, तू ही है मेरी ज़िंदगी
तू नहीं है तो क्या है, तू ही है मेरी ज़िंदगी
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