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तुम जिस ज़मीं पर हो मैं
तुम जिस ज़मीं पर हो मैं
जब मैं तुम्हें निशात-ए-मुहब्बत न दे सका
जब मैं तुम्हें निशात-ए-मुहब्बत न दे सका
तुम्हारे होने से है सब कुछ मुझ को
तुम्हारे होने से है सब कुछ मुझ को
तू नहीं है तो मैं क्या हूँ, तेरे बिना क्या मैं
तू नहीं है तो मैं क्या हूँ, तेरे बिना क्या मैं
हर बार मेरे सामने आती रही हो तुम
हर बार मेरे सामने आती रही हो तुम
तुम हकीकत नहीं हो हसरत हो
तुम हकीकत नहीं हो हसरत हो
#ग़ज़ल
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