📖 जॉन एलिया · कविता संग्रह

जॉन एलिया

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दिल तमन्ना से डर गया

ग़ज़ल 1981 145 0 जॉन एलिया
दिल तमन्ना से डर गया जानम
सारा नशा उतर गया जानम

अब सँवारते रहो बला से मेरी
दिल ने सरकार ख़ुदकुशी कर ली

मेरी हर बात बे-असर ही रही
नुक़्स है मेरे हर बयाँ में क्या

चाँद तारे बिलावजह ख़ुश हैं
मैं तो किसी और से मुख़ातिब हूँ

एक नाटक है ज़िंदगी जिस में
आह की जाए, वाह की जाए

मुस्तक़िल बोलता रहता ही रहता हूँ
कितना ख़ामोश हूँ मैं अंदर से
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