तुम्हारे होने से है सब कुछ मुझ को
ग़ज़ल
तुम्हारे होने से है सब कुछ मुझ को
तुम्हारे न आने से है बेहाल
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तू नहीं है तो मैं क्या हूँ
ग़ज़ल
तू नहीं है तो मैं क्या हूँ, तेरे बिना क्या मैं
तेरे होंठों पे हो जो नाम, वो है मेरा नाम
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जब मैं तुम्हें निशात-ए-मुहब्बत न दे सका
ग़ज़ल
जब मैं तुम्हें निशात-ए-मुहब्बत न दे सका
तो क्या हुआ, तो क्या हुआ
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तुम जिस ज़मीं पर हो
ग़ज़ल
तुम जिस ज़मीं पर हो मैं
तुम जिस ज़मीं पर हो मैं
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