📖 जॉन एलिया · कविता संग्रह

जॉन एलिया

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आप अपना ग़ुबार थे हम तो ग़ज़ल
आप अपना ग़ुबार थे हम तो
याद थे यादगार थे हम तो
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हम को यारों ने याद भी न रखा ग़ज़ल
हम को यारों ने याद भी न रखा
जॉन यारों के यार थे हम तो
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बे-तरह नागवार थे हम तो ग़ज़ल
बे-तरह नागवार थे हम तो
सख़्त बे-एतिबार थे हम तो
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